ज़िंदगी
ऐ ज़िंदगी---
जाने कितने रंग दिखाती ।
कभी हँसाती, कभी रुलाती।
कभी दिन में तारे दिखलाती।
कभी खुशियों की बारिश है लाती,
कभी गमों का दरिया भर जाती है।
अच्छे - बुरे कर्मों का हिसाब
किस्तों में कर जाती। ऐ ज़िंदगी---
कभी आवाक्- सी है ज़िंदगी,
तो कभी...