Saturday, March 7, 2026

पुलिस कस्टडी के दौरान रमेश चौहान की हालत बिगड़ने और फिर मौत के बाद हालात तनावपूर्ण तहसील में चक्काजाम, 7-8 अन्य ग्रामीणों की भी बेरहमी से पिटाई का आरोप, MLA उमेश पटेल भी एक्टिव

Must Read

पुलिस कस्टडी के दौरान रमेश चौहान की हालत बिगड़ने और फिर मौत के बाद हालात तनावपूर्ण तहसील में चक्काजाम, 7-8 अन्य ग्रामीणों की भी बेरहमी से पिटाई का आरोप, MLA उमेश पटेल भी एक्टिव

 

खरसिया (परासकोल) में पुलिस कस्टडी के दौरान ग्रामीण रमेश चौहान की हालत बिगड़ने और फिर मौत के बाद हालात तनावपूर्ण हो गए हैं। खरसिया पुलिस कस्टोडियल डेथ के आरोप में बुरी तरह घिर चुकी है। पुलिस कार्यप्रणाली से आक्रोशित सैकड़ों ग्रामीणों और चौहान समाज के लोगों ने खरसिया तहसील ऑफिस का घेराव कर चक्काजाम कर दिया है। हालात को बेकाबू होता देख एसडीएम (SDM) और एसडीओपी (SDOP) ग्रामीणों के साथ बंद कमरे में शांति और समझौते की मीटिंग कर रहे हैं। उधर खरसिया विधायक उमेश पटेल भी इस मामले को लेकर एक्टिव है।

 

 

कस्टोडियल डेथ के विरोध में सैकड़ों ग्रामीणों और चौहान समाज का खरसिया तहसील में चक्काजाम

ग्रामीणों का सनसनीखेज आरोप: पूछताछ के नाम पर 7-8 अन्य ग्रामीणों को भी थाने में बेरहमी से पीटा गया

पीड़ित परिवार के लिए 1 सरकारी नौकरी, आर्थिक सुरक्षा और दोषी पुलिसकर्मियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग

हालात संभालने के लिए SDM और SDOP की ग्रामीणों के साथ शांति वार्ता जारी, रायपुर में हुआ पोस्टमार्टम

खरसिया विधायक उमेश पटेल ने ली मामले की जानकारी, प्रशासन के आला अधिकारियों से की बातचीत

तहसील में चक्काजाम, 7-8 अन्य ग्रामीणों की पिटाई का खुलासा

​परासकोल के अनिल चौहान हत्याकांड में जिस तरह पुलिस पूछताछ के बाद रमेश चौहान की रायपुर में मौत हुई, उसने पुलिस महकमे को कटघरे में खड़ा कर दिया है। मौत की खबर मिलते ही पीड़ित के गांव और चौहान समाज के लोग भारी संख्या में खरसिया तहसील ऑफिस पहुंच गए और चक्काजाम कर दिया।

 

 

प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों ने एक और बेहद गंभीर और सनसनीखेज आरोप लगाया है। उनका कहना है कि अनिल चौहान मर्डर केस में पुलिस ने सिर्फ रमेश चौहान को ही नहीं, बल्कि गांव के 7 से 8 अन्य लोगों को भी पूछताछ के लिए थाने बुलाया था और वहां उन सभी के साथ भी बेरहमी से मारपीट की गई है।

 

मौके पर पहुंची ग्रामीण युवती ने बताई पुलिस बर्बरता की कहानी

 

नौकरी और मुआवजे की मांग, अंदर चल रही मीटिंग

​प्रदर्शनकारियों की सीधी मांग है कि इस ‘हिरासत में मौत’ के जिम्मेदार दोषी पुलिसकर्मियों पर तत्काल और कड़ी से कड़ी वैधानिक कार्रवाई की जाए। इसके साथ ही, रमेश चौहान के परिवार की आर्थिक सुरक्षा की गारंटी दी जाए और परिवार के किसी एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए।

 

​स्थिति की गंभीरता को देखते हुए खरसिया एसडीओपी और एसडीएम तुरंत मौके पर पहुंचे। फिलहाल दोनों अधिकारी गांव और समाज के प्रमुख लोगों के साथ अंदर बैठकर शांति और समझौते के लिए मीटिंग कर रहे हैं।

 

 

डेथ सर्टिफिकेट में ‘ब्रेन हेमरेज’ और पीएम रिपोर्ट का इंतजार

​गौरतलब है कि पुलिस कस्टडी के बाद लकवाग्रस्त हुए रमेश को पहले रायगढ़ और फिर रायपुर के DKS सुपर स्पेशलिटी अस्पताल रेफर किया गया था। वहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। DKS अस्पताल के डेथ सर्टिफिकेट में मौत की वजह ‘Intraparenchymal hemorrhage’ (दिमाग के अंदरूनी हिस्से में नस फटना और भारी ब्लीडिंग) बताई गई है।

 

इस मेडिकल रिपोर्ट ने ग्रामीणों की ‘मारपीट और टॉर्चर’ वाली थ्योरी को बहुत मजबूत कर दिया है। सूत्रों के अनुसार, रमेश का पोस्टमार्टम रायपुर में ही कर लिया गया है, जिसकी रिपोर्ट से मौत की असल वजहों का आधिकारिक खुलासा होगा।

 

 

सियासी पारा हाई, विधायक उमेश पटेल भी एक्टिव

​इस कस्टोडियल डेथ के मामले में सियासी पारा भी चढ़ गया है। ग्रामीण कांग्रेस पहले ही इस मामले की उच्च स्तरीय जांच और स्वतंत्र जांच दल बनाने की बात कह चुकी है। वहीं, खरसिया विधायक उमेश पटेल भी इस पूरे प्रकरण पर नजर बनाए थे विधायक उमेश पटेल रायपुर से सीधा तहसील कार्यालय पहुंचकर परिजनों से बातचीत की गई शाम को और उन्होंने इस संवेदनशील मामले को लेकर प्रशासनिक अधिकारियों से सीधे बातचीत भी की लेकिन बात नहीं सुलझी

 

 

पुलिस कस्टडी के बाद हुई रमेश चौहान की मौत का मामला अब पूरी तरह से प्रशासन के हाथ से निकल चुका है। एसडीएम (SDM) और एसडीओपी (SDOP) के साथ हुई शांति वार्ता बेनतीजा रहने के बाद, आक्रोशित ग्रामीणों ने बोतल्दा के पास नेशनल हाईवे 49 (NH-49) को पूरी तरह से जाम कर दिया है। बवाल बढ़ता देख खरसिया विधायक उमेश पटेल भी सीधे रायपुर से चक्काजाम स्थल पर पहुंच गए हैं।

 

 

SDM और SDOP के साथ ग्रामीणों और चौहान समाज की शांति वार्ता रही पूरी तरह बेनतीजा

न्याय की मांग पर अड़े आक्रोशित ग्रामीणों ने बोतल्दा के पास NH-49 को किया जाम

हाईवे के दोनों ओर लगा वाहनों का लंबा जाम लगना शुरू, पुलिस और जिला प्रशासन के फूले हाथ-पांव

रायपुर से सीधे धरना स्थल पहुंचे खरसिया विधायक उमेश पटेल, ग्रामीणों से कर रहे हैं बातचीत

वार्ता रही बेनतीजा, हाईवे पर उतरा गुस्सा

​कस्टोडियल डेथ (हिरासत में मौत) के विरोध में खरसिया तहसील में प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों को मनाने की प्रशासन की सारी कोशिशें नाकाम हो गई हैं। दोषी पुलिसकर्मियों पर तत्काल एफआईआर (FIR), परिवार को 1 सरकारी नौकरी और मुआवजे की मांग पर अड़े ग्रामीणों ने तहसील की वार्ता बेनतीजा होने के बाद अपना आंदोलन और उग्र कर दिया है।

 

गुस्साए ग्रामीणों और चौहान समाज के लोगों का हुजूम बोतल्दा पहुंच गया और वहां जाकर नेशनल हाईवे 49 (NH-49) को पूरी तरह से जाम कर दिया है।

 

हाईवे पर लंबा जाम लगना शुरू, प्रशासन के फूले हाथ-पांव

ग्रामीणों के इस उग्र चक्काजाम के कारण NH-49 पर मालवाहकों, ट्रकों और यात्री बसों की लंबी-लंबी कतारें लगनी शुरू हो गई हैं। कस्टोडियल डेथ जैसे बेहद संवेदनशील मामले में सीधा नेशनल हाईवे ब्लॉक हो जाने से रायगढ़ पुलिस और जिला प्रशासन के आला अधिकारियों के हाथ-पांव फूल गए हैं। मौके पर भारी पुलिस बल तैनात है, लेकिन पब्लिक का गुस्सा शांत होने का नाम नहीं ले रहा है।

 

रायपुर से सीधे चक्काजाम स्थल पहुंचे MLA उमेश पटेल

इस बिगड़ते हालात और बढ़ते बवाल के बीच, खरसिया विधायक और पूर्व मंत्री उमेश पटेल सीधे रायपुर से बोतल्दा चक्काजाम स्थल पर पहुंच चुके हैं।

 

 

​वे बीच सड़क पर धरने पर बैठे प्रदर्शनकारी ग्रामीणों और पीड़ित परिवार के बीच पहुंचकर उनसे बातचीत कर रहे हैं। अब देखना यह है कि विधायक की मध्यस्थता के बाद प्रशासन पीड़ित परिवार की मांगों के आगे झुकता है या इस चक्काजाम को खोलने के लिए कोई बल प्रयोग किया जाता है। फिलहाल मौके पर भारी तनाव का माहौल है।

 

 

 

 

 

खरसिया (परासकोल) में पुलिस कस्टडी के दौरान हुई रमेश चौहान की मौत और NH-49 बोतल्दा पर हुए भारी बवाल का अंत एक बेहद चौंकाने वाले ‘समझौते’ के साथ हुआ है। विधायक उमेश पटेल की मध्यस्थता के बाद प्रशासन ने महज दो आरक्षकों (सिपाहियों) को ‘लाइन अटैच’ कर और पीड़ित की पत्नी को ‘कलेक्टर दर’ की छोटी सी नौकरी का आश्वासन देकर इतने बड़े मामले को फिलहाल शांत करा लिया है।

 

विधायक उमेश पटेल की मध्यस्थता के बाद प्रशासन और आक्रोशित ग्रामीणों के बीच हुआ समझौता

कस्टोडियल डेथ के इतने बड़े मामले में बिना किसी FIR के सिर्फ दो आरक्षकों को किया गया ‘लाइन अटैच’

पीड़ित परिवार को न्याय के नाम पर प्रशासन ने दिया पत्नी को ‘कलेक्टर दर’ की नौकरी का लॉलीपॉप

बवाल शांत करने के लिए न्यायिक जांच का वादा, प्रशासन ने ग्रामीणों से मांगे 5 लोगों के नाम

समझौते के बाद बोतल्दा NH-49 से हटा चक्काजाम, एक गरीब की जान की कीमत पर उठ रहे गंभीर सवाल

हत्या का आरोप, लेकिन कार्रवाई सिर्फ ‘लाइन अटैच’

​कस्टोडियल डेथ को लेकर बोतल्दा हाईवे पर जो आक्रोश धधक रहा था, वह विधायक उमेश पटेल के पहुंचने और प्रशासन के साथ हुई लंबी बातचीत के बाद शांत तो हो गया, लेकिन इस शांति की शर्तें सिस्टम की कार्यप्रणाली पर करारा तमाचा हैं।

 

​इतने गंभीर मामले में, जहां मेडिकल रिपोर्ट में सिर में ‘ब्रेन हेमरेज’ (नस फटने) की पुष्टि हुई थी और ग्रामीणों ने 7-8 अन्य लोगों को भी पीटने के सीधे आरोप लगाए थे, वहां किसी भी पुलिस अधिकारी पर हत्या (FIR) या निलंबन (Suspension) की गाज नहीं गिरी। प्रशासन ने महज अपनी चमड़ी बचाते हुए बलि के बकरे के रूप में दो आरक्षकों को ‘लाइन अटैच’ कर दिया है।

 

एक गरीब की जान और ‘कलेक्टर दर’ की नौकरी!

​मृतक के परिवार को न्याय और उचित आर्थिक सुरक्षा की जो उम्मीद थी, उसे प्रशासन ने ‘कलेक्टर दर’ (संविदा/दैनिक वेतन) की एक छोटी-मोटी नौकरी के वादे में समेट दिया। प्रशासन ने पीड़ित की पत्नी को नौकरी देने का आश्वासन दिया है।

 

​सवाल यह उठता है कि जब असली कातिल (राहुल यादव) पकड़ा जा चुका है, तो पूछताछ के नाम पर एक निर्दोष की जान लेने के जिम्मेदार पुलिसकर्मियों को महज़ विभागीय ‘लाइन अटैच’ करके कैसे बचाया जा सकता है? क्या एक गरीब ग्रामीण की जान की कीमत सिर्फ ‘कलेक्टर दर’ की नौकरी है?

 

‘न्यायिक जांच’ का झुनझुना और 5 नाम

​आक्रोशित भीड़ को शांत करने के लिए प्रशासन ने इस पूरे मामले की ‘न्यायिक जांच’ का वादा भी कर दिया है। इसके लिए बाकायदा ग्रामीणों की तरफ से 5 लोगों के नाम मांगे गए हैं, जो इस जांच प्रक्रिया में अपनी बात रखेंगे।

 

विधायक उमेश पटेल की मध्यस्थता और इस प्रशासनिक सौदेबाजी के बाद ग्रामीणों ने NH-49 से चक्काजाम खत्म कर दिया है और यातायात बहाल हो गया है। लेकिन इस पूरे ‘एंटी-क्लाइमेक्स’ ने रायगढ़ की जनता और सिस्टम को समझने वालों के मन में एक गहरा सवाल छोड़ दिया हैं…

 

“जब मरने वाला एक गरीब और आम आदमी हो, तो क्या न्याय का तराजू इसी तरह काम करता है

 

वहीं खरसिया एसडीओपी का कहना है कि मृतक आदतन शराब का सेवन करता था और प्रारंभिक जानकारी के अनुसार स्वास्थ्य संबंधी कारणों से उसकी मौत हुई है। पुलिस के विरुद्ध लगाए गए टॉर्चर के आरोपों को उन्होंने बेबुनियाद बताया है।

फिलहाल पूरे मामले में प्रशासनिक जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। यदि जांच में पुलिस प्रताड़ना की पुष्टि होती है तो मामला मानवाधिकार उल्लंघन के बड़े मुद्दे के रूप में सामने आ सकता है।

Latest News

भाजपा किसान मोर्चा के जिला सह प्रवक्ता बने जयप्रकाश डनसेना

भाजपा किसान मोर्चा के जिला सह प्रवक्ता बने जयप्रकाश डनसेना     खरसिया किसान पुत्र किसान हितैषी किसान मित्र बाबा सिद्धेश्वर नाथ...

More Articles Like This