उमेश पटेल और लालजीत ने थामी खिलाफत की मशाल : अंबुजा सीमेंट्स की जनसुनवाई रद्द करने की मांग को लेकर रात तक सड़क पर बैठे रहे आदिवासी किसान
रायगढ़। धरमजयगढ़ में 870 हेक्टेयर जमीन के नीचे दबा कोयला निकालने के लिए सरकार ने अडाणी ग्रुप की अंबुजा सीमेंट्स को आवंटन किया है। पांच गांवों के आदिवासियों ने इसके विरोध में बिगुल फूंक दिया है। गुरुवार को सैकड़ों आदिवासी पुरुष और महिलाएं कलेक्टोरेट पहुंचे और धरने पर बैठ गए। 11 नवंबर की जनसुनवाई निरस्त करने की मांग लेकर देर रात तक वहीं डटे रहे। कई महिलाएं अपने दूधमुंहे बच्चे को लेकर पहुंची थी। पुरुंगा कोल ब्लॉक का आवंटन अडाणी ग्रुप की कंपनी अंबुजा सीमेंट्स को हुआ है। पुरुंगा कोल ब्लॉक में इसलिए अंडरग्राउंड माइनिंग किया जा रहा है क्योंकि स्ट्रिपिंग रेशियो बहुत ज्यादा है। ओपन कास्ट होता तो मुआवजे के अलावा खनन की लागत बहुत ज्यादा होती। 11 नवंबर को इसके लिए जनसुनवाई होनी है लेकिन ग्रामीण भूमिगत खदान से होने वाले नुकसान के चलते विरोध कर रहे हैं। पहले इस कोल ब्लॉक का आवंटन छग नेचुरल रिसोर्सेस प्रालि कंपनी को किया गया था। बाद में स्वामित्व अंबुजा सीमेंट को ट्रांसफर किया गया है
छग नेचुरल रिसोर्सेस से अंबुजा सीमेंट को ओनरशिप ट्रांसफर की गई है। छाल के कोकदार, तेंदुमुड़ी, पुरुंगा और साम्हरसिंघा गांव की 870 हेक्टेयर भूमि प्रभावित होगी। सालाना 2.25 मिलियन टन कोयला उत्पादन होना है। चार गांवों में 869 हेक्टेयर क्षेत्रफल पर माइंस फैली हुई है।। इसमें से 621.33 हे. वन भूमि, 26.89 हे. शासकीय भूमि और 220 हे. निजी भूमि है। गुरुवार को रायगढ़ पहुंचे ग्रामीणों ने एक स्वर में जनसुनवाई निरस्त करने की मांग की। इस पर जिला प्रशासन ने कोई निर्णय नहीं लिया है। यह पूरा इलाका घने जंगल से घिरा हुआ है। हाथियों की आवाजाही का रूट भी यही है। इन सब बातों को दरकिनार करके यहां अंडरग्राउंड माइंस खुलवाने जनसुनवाई कराई जा रही है। पूरा कोयला सडक़ मार्ग से परिवहन किया जाएगा। इसका दूरगामी असर होगा। जो भयावह स्थिति तमनार के लोग देख रहे हैं, वही अब धरमजयगढ़ में भी होगी। क्षेत्र में दुष्प्रभावों को रोकने, पुनर्वास, प्रदूषण आदि मुद्दों पर बिना कोई चर्चा किए सीधे जनसुनवाई करवाई जा रही है।
अदानी ग्रुप के अंबुजा सीमेंट कंपनी को धरमजयगढ़ ब्लाक के रूपुंगा मेंं आंबटित कोल माइंस का क्षेत्रवासी सडक़ पर उतर कर पुरजोर विरोध कर रहे हैं
। 11 नवंबर को माइंस की पर्यावरणीय स्वीकृति के लिए होने वाली जनसुनवाई को निरस्त करने की मांग करते हुए बड़ी संख्या में ग्रामीण महिला-पुरूष गुरूवार को जिला मुख्यालय पहुंचे और कलेक्ट्रेट का घेराव किया। वहीं प्रशासनिक अधिकारी जब उनसे ज्ञापन लेने पहुंचे तो वे भडक़ उठे, ग्रामीणों का कहना था कि पूर्व में भी उनके द्वारा कलेक्टर को आवेदन देकर जनसुनवाई निरस्त करने की मांग की गई थी लेकिन आज पर्यंत किसी प्रकार का निर्णय नहीं लिया गया है। ऐसे मेें कलेक्टर स्वयं आकर उक्त आवेदन पर क्या कार्रवाई किये हैं? यह बतायें साथ ही जनसुनवाई निरस्त करने की घोषणा करें तब ही वे यहां से जायेंगे। अधिकारियों की समझाईश भी कोई काम नहीं आई और वे अपनी मांग पर अड़े रहे तथा चक्रधरनगर थाना के सामने सडक़ पर चक्का जाम करते हुए बैठ गये।
देर रात तक कलेक्ट्रेट मार्ग पर आवागमन पूरी तरह से बंद रहा। धरमजयगढ़ क्षेत्र के ग्राम रूपुंगा में अदानी ग्रुप को आबंटित भूमिगत कोयला खदान के लिए पर्यावरणीय जनसुनवाई 11 नवंबर को प्रस्तावित है। कोल माइंस की पर्यावरणीय स्वीकृति के लिए आयोजित होने वाली जनसुनवाई को निरस्त करने की क्षेत्रवासी मांग कर रहे हैं। अपनी इस मांग को लेकर क्षेत्र के ग्रामीण महिला, पुरूष भारी संख्या में रायगढ़ पहुंचे। चार पहिया वाहनों से रायगढ़ पंहुच कर सभी ग्रामीण शहीद विप्लव त्रिपाठी स्टेडियम मेें जमा हुए। वहीं मिनी स्टेडियम से रैली की शक्ल में निकल कर नारेबाजी करते हुए कलेक्ट्रेट का घेराव किया। एसडीएम कार्यालय की ओर जाने वाली सडक़ के पास पुलिस ने बेरिकेट्स लगा कर सभी प्रदर्शनकारियों को वहीं रोक दिया था लिहाजा वहीं पर ग्रामीणों ने अपना विरोध प्रकट किया।
ग्रामीणों का कहना था कि कोल माईंस का शुरू से ही क्षेत्रवासी विरोध कर रहे हैं। वहीं उन्होंने जनसुनवाई को निरस्त करने पूर्व में भी कलेक्टर व धरमयगढ़ एसडीएम को ज्ञापन सौंपा था। इसके अलावा प्रभावित ग्राम पंचायत पुरुंगा, तेन्दूमुड़ी व साम्हरसिंघा में विशेष ग्राम सभा बुलवाकर जनसुनवाई निरस्त करने का प्रस्ताव भी पारित किया गया था। बावजूद इसके प्रशासन उनकी मांग पर ध्यान नहीं दे रहा है तथा फर्जी ग्राम सभा का प्रस्ताव बना कर जनसुनवाई कराई जा रही है। यही वजह है कि आज उन्हें 90 किलोमीटर दूर से यहां आकर आंदोलन करना पड़ रहा है। उनका कहना था कि प्रस्तावित कोल माइंस क्षेत्र आदिवासी बाहुल्य है तथा पांचवीं अनुसूची के अंतर्गत आता है जहां पेशा कानून लागू है परंतु प्रशासन पेशा कानून का उल्लंघन कर रही है।
गांवों को क्यों नहीं देते सूचना?
कोयला निकलेगा ग्रामीण किसान की जमीन से, गांवों की पीएमजीएसवाय रोड से परिवहन होगा, गांवों के पेड़ कटेंगे, तालाब सूखेंगे, कोल डस्ट के बीच भी ग्रामीण आदिवासी ही रहेगा, लेकिन विडंबना है कि उन्हीं ग्रामीणों को नहीं बताया जाता कि उनकी जमीन पर कोयला खदान शुरू होगी। धरमजयगढ़ से पहुंचे ग्रामीणों की यही व्यथा है। कोयला खदान तो कॉर्पोरेट कंपनी को मिलेगी जो करोड़ों-अरबों रुपए कमाएगी। इसकी कीमत गांवों को चुकानी पड़ेगी।
खरसिया विधायक उमेश पटेल को कहना है कि पुरुंगा, समरसिंघा और तेंदूकोना में ग्रामसभा का प्रस्ताव किया ही नहीं गया है। इसके बिना ही जनसुनवाई की जा रही है। कहीं ग्रामसभा हुई है तो वो भी फर्जी है। ग्रामीणों का कहना है कि वे अपनी जल, जंगल, जमीन नहीं देना चाहते। पहले ग्रामसभा का प्रस्ताव हो, ग्रामीणों की सहमति हो, उसके बाद कोयला खदान शुरू हो। यदि जनसुनवाई होती है तो सबसे चर्चा करके निर्णय लिया जाएगा।
कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी का कहना है कि जनसुनवाई का मतलब ही यही है कि ग्रामीणों की बात सुनी जाए। इसलिए एक तारीख तय की गई है। जिसको अपनी बात कहनी है, वह खुलकर वहां कह सकता है। ग्रामसभा तो जनसुनवाई के बाद होती है। जनसुनवाई के लिए कोई ग्रामसभा नहीं होती। जनसुनवाई में सभी को अपनी बात कहने का अवसर दिया जाता है।
सात गांवों के लोग हों शामिल
अंबुजा सीमेंट्स की कोयला खदान से सात गांव प्रभावित होंगे। विधायक उमेश पटेल ने कहा कि प्रशासन यदि लिखित में देता है कि जनसुनवाई में सात गांवों के लोग शामिल होंगे तो आंदोलन खत्म किया जा सकता है। लेकिनरात तक प्रशासन की ओर से कोई निर्णय नहीं लिया गया था। ग्रामीण जनसुनवाई को निरस्त करने की मांग पर अड़े हैं। कोयला खदान से प्रभावित क्षेत्र का चिह्नांकन और प्रभावों का आकलन ठीक से नहीं किया जाता। दुष्प्रभावों के चलते माइंस के पास गांव में रहना दूभर हो जाता है।
हरे भरे जंगल को बर्बाद नहीं होने देंगे
प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों का यह भी कहना था कि उनका आजीविका का मुख्य साधन खेती और वनोपज है। खदान के कारण होने वाले प्रदूषण से खेती पर भी असर पड़ेगा। इसके अलावा उक्त क्षेत्र में आरक्षित वन है तथा हाथियों सहित अन्य वन्य प्राणियों का रहवास है। खदान के कारण हाथी भी प्रभावित होंगे और वे भोजन पानी की तलाश में गांव का रूख करेंगे जिससे हमेशा जानमाल के नुकसान का भय बना रहेगा। दूसरी ओर हम ग्रामीण हाथियों का सरंक्षण चाहते हैं।
काम नहीं आई अधिकारियों की समझाईश
कोल माइंस का विरोध करते हुए ग्रामीणों ने दोपहर को तकरीबन दो बजे से कलेक्ट्रेट के सामने प्रदर्शन शुरू किया था। कुछ देर तक नारेबाजी करने के बाद एसडीएम महेश कुमार शर्मा व तहसीलदार शिव कुमार डनसेना उनसे ज्ञापन लेने पहुंचे तब ग्रामीणों ने उन्हें ज्ञापन देने से साफ इनकार कर दिया। अधिकारियों की समझाईश भी कोई काम नहीं आई और वे अपनी मांग पर अड़े रहे तथा चक्रधरनगर थाना के सामने सडक़ पर चक्का जाम करते हुए बैठ गये। वहीं अपर कलेक्टर अपूर्व प्रियेश टोप्पो उन्हें मनाने पहुंचे लेकिन उनका प्रयास भी विफल रहा। ग्रामीण कलेक्टर से ही चर्चा करने की मांग पर अड़े रहे। यही वजह रही कि प्रदर्शन काफी लंबा चला और देर रात तक प्रदर्शनकारी अपनी मांग को लेकर सडक़ पर ही बैठे रहे।
अधिकारियों से बात करते हुए उमेश पटेल
उमेश पटेल व लालजीत का भी ग्रामीणों को मिला समर्थन
शहीद विप्लव त्रिपाठी स्टेडियम में जमा होने के बाद ग्रामीण धरजयगढ़ विधायक लालजीत राठिया के साथ कलेक्ट्रेट का घेराव करने पंहुचे थे। वहीं धरमजयगढ़ के क्षेत्रवासियों द्वारा किये जा रहे अंादोलन की सूचना मिलने पर पूर्व मंत्री व खरसिया विधायक उमेश पटेल ने भी कलेक्ट्रेट पहुंच कर ग्रामीणों का समर्थन किया। वहीं विधायकद्वय भी ग्रामीणों के साथ ही धरने पर बैठे थे। इसके साथ ही कांग्रेस नेता अनिल अग्रवाल चीकू व नगेन्द्र नेगी, सुरेन्द्र सिदार, जयंत बोहिदार भी उपस्थित रहे। इसके अलावा जनचेतना मंच के राजेश त्रिपाठी भी उपस्थित रहे।
पुलिस की रही चाक चौबंद व्यवस्था
धरमजयगढ़ क्षेत्र के ग्रामीणों द्वारा कलेक्ट्रेट घेराव की पूर्व से सूचना होने पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुलिस की भी चाक चौबंद व्यवस्था रही। सुरक्षा की दृष्टि से पहले ही एसडीएम कार्यालय की ओर जाने वाले मार्ग केे पास तथा अंबेडकर चौक में जिला न्यायालय के पास बेरिकेट लगा कर रोड को ब्लाक कर दिया गया था। इसके अलावा ऐहतियातन तौर पर कलेक्ट्रेट गेट के सामने भी बेरिकेट लगा दिये गये थे। गुरूवार को दिन भर इस मार्ग पर आवागमन पूरी तरह से बंद रहा। वहीं वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के साथ ही चक्रधरनगर, सिटी कोतवाली, यातायात थाना,कोतरा रोड थाने से भी पुलिस बल तैनात किया गया था। इसके अलावा पुलिस लाईन से भी अतिरिक्त बल बुलवाया गया था। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक आकाश मरकाम, डीएसपी सुशांतो बनर्जी, अनिल विश्वकर्मा सहित अन्य वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भी मौजुद रहे।
क्या कहते हैं लालजीत
धरमजयगढ़ विधायक लालजीत राठिया ने कहा कि तीन पंचायत के किसान आये हुए है। उनका कहना है कि जनसुनवाई निरस्त करने की मांग को लेकर आये हैं। ग्रामीणों ने विशेष ग्राम सभा बुलवाकर जनसुनवाई निरस्त करने का प्रस्ताव भी पारित किये हैं। जनता यही चाहती है कि हमारे कलेक्टर हमसे मिलें और शासन तक हमारी बातों को पहुंचाये। उन्होंने भी जनसुनवाई को निरस्त करने की मांग का समर्थन किया।
क्या कहते हैं उमेश पटेल
खरसिया विधायक उमेश पटेल ने कहा कि सुबह से गांव के लोग यहां बैठे हुए हैं और सभी की मांग यही है कि जनसुनवाई निरस्त हो। 11 तारीख को होने वाली जनसुनवाई बिना ग्राम सभा के प्रस्ताव के हैं और अदानी कंपनी के लिए जिस तरह से नियम कानून को ताक पर रख दिया जा रहा है, ग्राम सभा के प्रस्ताव को भी मान्य नहीं कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कलेक्टर मिलने नहीं आ रहे हैं, वह अलग विषय है बस जनसुनवाई को निरस्त करने का वे आदेश कर दें हम चले जायेंगे

