मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय सक्ती में सूचना का अधिकार का किया जा रहा है अवहेलना

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मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय सक्ती में सूचना का अधिकार का किया जा रहा है अवहेलना

सक्ती। सरकार ने न्यूनतम साझा कार्यक्रम में किए गए अपने वायदो तथा पारदर्शिता युक्त शासन व्यवस्था एवं भ्रष्टाचार मुक्त समाज बनाने के लिए 12 मई 2005 में सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 संसद में पारित किया, जिसे 15 जून 2005 को राष्ट्रपति की अनुमति मिली और अन्ततः 12 अक्टूबर 2005 को यह कानून जम्मू कश्मीर को छोड़कर पूरे देश में लागू किया गया ताकि राष्ट्र के नागरिकों को हर प्रकार की जानकारी प्राप्त हो सके लेकिन उच्च पदों पर बैठे अधिकारी आरटीआई कानून की किस प्रकार से धज्जियां उड़ाते हैं यह मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय सक्ती में आकर देखा जा सकता है यहां क्षेत्र के आरटीआई कार्यकर्ता कुछ जानकारी के लिए आरटीआई के तहत आवेदन लगाने कार्यालय के आवक जावक में आवेदन लेकर पहुंचे

जहां के बाबू ने उन्हें उनका आवेदन शुल्क के रूप संलग्न किए जा रहे 10 रुपए के नगद नोट को लेने से साफ साफ मना कर दिया गया, और कहा गया कि यहां सिर्फ पोस्टल ऑर्डर के साथ आवेदन जमा होता है नगद लेने को मन किया गया है, जब इसके बारे में आर टी आई कार्यकर्ता ने उनसे पूछा कि कोई लिखित आदेश जारी किया गया कि नगद नहीं लेना है तब उनके पास इसका जवाब था पहले के जो मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी थे उन्होंने मना किया तब से चल रहा है।

*स्वयं अधिकारी को नहीं है नियम की जानकारी…..*

इस संबंध में जब हमारे संस्था के द्वारा वर्तमान मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी पूजा अग्रवाल से जानकारी चाही तो उनका कहना है सूचना के अधिकार में कैसे करते नहीं पता है जैसे प्रोटोकॉल बना है पहले का वैसे आवेदन दे दीजिए, अधिकारी के खुद के इस तरह के बयान से लोग सोच में पड़ गए है कि आगे स्वास्थ्य विभाग का कार्य कैसे चलेगा। विभाग के 10 रुपए नगद के साथ आवेदन न लेने से सवाल उठता है कि शासन ने जो आरटीआई कानून बनाया हुआ है वह इस अधिकारी के कार्यालय में कोई मायने नहीं रखता या यहां के अधिकारी अपने हिसाब से स्वयं नियम बना रहे है, जबकि आरटीआई के तहत कोई भी ग्रामीण एक सादे कागज में 10 रुपये नगद या पोस्टल आर्डर, बैंक चालान के साथ आवेदन कर सकता है लेकिन इस कार्यालय में आवेदन न स्वीकार करना, संबंधित विभाग के अधिकारी कर्मचारियों के कार्यशैली पर सवाल उठने लगा है।

 

 

*कार्यालय भर में कही नही लगा है “सूचना का अधिकार” का बोर्ड*

 

हम आपको बता की प्रत्येक सरकारी कार्यालय जहा सूचना का अधिकार लागू होता है वहा सूचना का अधिकार का बोर्ड लगाना होता है मगर यहां तक की मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय सक्ती के परिसर में आरटीआई से संबंधित किसी प्रकार का सूचना बोर्ड नहीं लगा है जबकि जिला मुख्यालय के अन्य कार्यालयों में बकायदा सूचना बोर्ड लगा हुआ है इस प्रकार यह आम जनता को गुमराह रहे हैं ताकि उन्हें किसी प्रकार घपले बाजी का आरटीआई कर का का जवाब नहीं देना पड़े।

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