Sunday, March 22, 2026
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सतनाम संदेश” : समाज की चेतना और संस्कृति का जीवंत दस्तावेज

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✦ “सतनाम संदेश” : समाज की चेतना और संस्कृति का जीवंत दस्तावेज

 

पत्रिका, समाज में साहित्य, संस्कृति और वैचारिक संदेश का माध्यम है — राकेश नारायण बंजारे

 

खरसिया | प्रगतिशील छत्तीसगढ़ सतनामी समाज के प्रदेश साहित्य प्रकोष्ठ के प्रवक्ता राकेश नारायण बंजारे द्वारा “सतनाम संदेश” पत्रिका की प्रतियाँ समाजजन, वरिष्ठजनों और युवाओं को निरंतर वितरित की जा रही है। ग्राम कुनकुनी में आवश्यक बैठक के दौरान उन्होंने पत्रिका प्रकाशन व इसके सामाजिक महत्व पर प्रकाश डाला। समाजजनों के बीच साहित्यिक महत्व के साथ सतनाम संस्कृति के प्रसार और समाज की वैचारिक एकता का सुंदर संदेश भी जागृत किया।

पत्रिका का महत्व बताते राकेश नारायण बंजारे ने कहा कि, “सतनाम संदेश, समाज का आईना है। यह पत्रिका हमारी संस्कृति, हमारे इतिहास और हमारी सामूहिक चेतना की जीवंत दस्तावेज़ है। सतनाम संस्कृति की जड़ें गहरी हैं और इस धरोहर को अगली पीढ़ियों तक पहुँचाने का दायित्व हम सभी का है।”

उन्होंने आगे कहा कि “बाबा गुरु घासीदास जी के सत्य, समानता और मानवता के संदेश आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने उनके समय में थे। जिस समाज ने अपनी संस्कृति और साहित्य को संजोकर रखा है, वही समाज आने वाले समय में गौरव के साथ खड़ा होता है। ‘सतनाम संदेश’ इसी सांस्कृतिक चेतना का वाहक है।”

बंजारे ने बताया कि पत्रिका में प्रकाशित सामग्री सतनाम संस्कृति, समाज सुधार, शिक्षा, साहित्य और शोध पर आधारित विविध सामग्री का एक समृद्ध मंच है। यह पत्रिका समाज के बौद्धिक विकास का माध्यम बन रही है और इसकी पहुँच प्रदेश सहित दूर-दराज व सीमांत क्षेत्रों तक निरंतर बढ़ रही है।

उन्होंने समाज के युवाओं से अपील करते हुए कहा कि, “आज सूचना और तकनीक का युग है। हमें सतनाम संस्कृति को डिजिटल माध्यमों के जरिए विश्व स्तर पर पहुँचाने की आवश्यकता है। यदि युवा आगे आएँ और लिखने-पढ़ने, अनुसंधान करने और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर संस्कृति का प्रसार करने का संकल्प लें, तो सतनाम समाज की धरोहर हमेशा सुरक्षित और सशक्त बनी रहेगी।”

उन्होंने यह भी बताया कि साहित्य और संस्कृति गंगा-यमुना की तरह हैं, अविभाज्य और पवित्र। साहित्य विचारों का दीप है और संस्कृति उस दीप की ज्योति। ‘सतनाम संदेश’ इसी ज्योति को समाज में फैलाने का कार्य कर रही है। यह सामाजिक सरोकारों, साहित्य और संस्कृति को समर्पित एक प्रतिष्ठित सामाजिक मासिक पत्रिका है जो विगत 12 वर्षों से निरंतर प्रकाशित होकर समाज की चेतना को दिशा दे रही है।

पत्रिका के संरक्षक के रूप में श्री एल. एल. कोशले का मार्गदर्शन प्राप्त है वहीं इसके प्रधान सम्पादक के दायित्व का निर्वहन डॉ. स्वामीराम बंजारे ‘सरल’ द्वारा किया जा रहा है। पत्रिका के सह-सम्पादक डॉ. अनिल कुमार भतपहरी हैं।

“सतनाम संदेश” का सम्पादक मंडल अनुभवी और सक्रिय साहित्यकारों से सुसज्जित है जिसमें सेवक राम बांधे, डॉ. रामायण प्रसाद टंडन, राकेश नारायण बंजारे एवं निशा ओगरे शामिल हैं।

पत्रिका का कार्यालय प्रगतिशील छत्तीसगढ़ सतनामी समाज, गुरु घासीदास सांस्कृतिक भवन, गुरु घासीदास कॉलोनी, पो.आ. प्रधान डाकघर, रायपुर (छत्तीसगढ़) – 492001 में स्थित है। “सतनाम संदेश” आज समाज की वैचारिक अभिव्यक्ति और सांस्कृतिक पहचान का सशक्त माध्यम बन चुकी है।

पत्रिका प्राप्त कर समाजजनों ने “सतनाम संदेश” को समाज की सांस्कृतिक धरोहर व वैचारिक दिशा देने वाला महत्वपूर्ण प्रकाशन बताया। सभी ने इसे सतनाम संस्कृति के संरक्षण, साहित्य के विस्तार और सामाजिक चेतना के लिए प्रेरक बताया।

इस अवसर पर समारू राम रात्रे (वरिष्ठ समाजसेवी, पूर्व अध्यक्ष, ब्लॉक खरसिया), राकेश नारायण बंजारे (प्रवक्ता, प्रदेश साहित्य प्रकोष्ठ), डॉ. भोजराम दीपक (पूर्व अध्यक्ष, ब्लॉक खरसिया), रामनारायण भारद्वाज (अध्यक्ष, ब्लॉक खरसिया), तोरन कुमार लक्ष्मी (पूर्व अध्यक्ष, युवा प्रकोष्ठ खरसिया), दिनेश कुमार बंजारे (अध्यक्ष, युवा प्रकोष्ठ), राधेश्याम खुंटे (उपाध्यक्ष), जीवन राम भारद्वाज (उपाध्यक्ष), मनीराम सोनी (सचिव), लोचन बंजारे, प्रगतिशील छत्तीसगढ़ सतनामी समाज ब्लॉक इकाई खरसिया, जिला रायगढ़ छग सहित वरिष्ठजन उपस्थित रहे।

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