Monday, August 10, 2026
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*छत्तीसगढ़ राज्य अशासकीय विद्यालय संचालक संघ का गठन*

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छत्तीसगढ़ राज्य अशासकीय विद्यालय संचालक संघ का गठन

प्रदेश भर के निजी स्कूलों की आवाज बनेगा यह संगठन, समस्याओं के निराकरण के लिए संगठित प्रयास शुरू

 

छत्तीसगढ़ में वर्षों से अपनी विभिन्न मांगों को लेकर संघर्षरत अशासकीय विद्यालयों ने अब संगठित होकर अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ने का निर्णय लिया है। इस उद्देश्य से छत्तीसगढ़ राज्य अशासकीय विद्यालय संचालक संघ का गठन किया गया है। हाल ही में धमतरी के गंगरेल में आयोजित एक बृहद बैठक में इस संगठन की घोषणा की गई, जिसमें प्रदेश अध्यक्ष के रूप में सर्वसम्मति से श्री सुबोध राठी (धमतरी) और प्रदेश सचिव के रूप में श्री मनोज पाण्डेय (जांजगीर) को चुना गया।

 

प्रमुख मांगें और समस्याएं:

 

RTE के तहत प्रतिपूर्ति राशि में देरी: कई वर्षों से अशासकीय विद्यालयों को समय पर आरटीई की प्रतिपूर्ति राशि नहीं मिल रही है। संगठन की प्रमुख मांग है कि सत्र समाप्ति के तुरंत बाद यह राशि जारी की जाए।

 

प्रतिपूर्ति राशि का अद्यतन: वर्तमान में यह राशि 2011 के दर पर दी जा रही है, जबकि महंगाई और लागत में कई गुना वृद्धि हो चुकी है। संगठन की मांग है कि यह राशि शासकीय विद्यालयों की प्रति छात्र वार्षिक खर्च के बराबर हो।

 

गणवेश एवं पुस्तकों हेतु राशि: आरटीई अंतर्गत छात्रों को दी जाने वाली गणवेश और किताबों की राशि बेहद कम है। इसे बढ़ाकर ₹2000 प्रति छात्र किया जाए।

 

सरस्वती साइकिल योजना का विस्तार: यह योजना निजी स्कूलों की गरीब छात्राओं को भी मिले।

 

पाठ्यपुस्तकों की समय पर आपूर्ति: सरकार द्वारा प्रदत्त पुस्तकें समय पर और संकुल स्तर तक पहुंचें।

 

स्कूल बसों की वैधता अवधि: वर्तमान 12 वर्षों की वैधता को बढ़ाकर 18 वर्ष किया जाए।

 

 

संगठन का उद्देश्य और आगे की योजना:

 

प्रदेश भर के 24 जिलों के संगठन इस नवगठित संघ से जुड़ चुके हैं और शेष जिलों में भी शीघ्र विस्तार की योजना है। प्रदेश अध्यक्ष सुबोध राठी और सचिव मनोज पाण्डेय ने जानकारी दी कि जल्द ही एक प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री एवं शिक्षा सचिव से मिलकर मांगों को प्रस्तुत करेगा। उन्हें विश्वास है कि वर्तमान सरकार, जो सभी वर्गों के हित में कार्य कर रही है, अशासकीय विद्यालयों की मांगों पर भी गंभीरता से विचार करेगी।

 

बैठक में इन जिलों के प्रतिनिधि रहे उपस्थित:

 

धमतरी, सूरजपुर, कोरबा, शक्ति, जांजगीर-चांपा, बिलासपुर, मुंगेली, बलौदा बाजार-भाटापारा, गरियाबंद, कांकेर, बालोद, सारंगढ़, कोरिया, दुर्ग, बस्तर सहित प्रदेश के अन्य जिलों के जिला अध्यक्ष, सचिव एवं पदाधिकारीगण बैठक में सम्मिलित हुए।

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