पावर का रौब या दबंगई? बिना नोटिस गरीब किसान की फसल पर चरवा दी गायें, 3.5 लाख का नुकसान!

डभरा/सक्ती (छत्तीसगढ़):
सत्ता और पद का नशा जब सिर चढ़कर बोलता है, तो कानून-कायदे ताक पर रख दिए जाते हैं। ताजा मामला सक्ती जिले के तहसील डभरा अंतर्गत ग्राम कांसा का है, जहाँ एक गरीब धोबी समाज के किसान की महीनों की हाड़-तोड़ मेहनत से तैयार खड़ी फसल को कथित रूप से सरपंच और उनके रसूखदार साथियों की शह पर मवेशियों से चरवाकर तबाह कर दिया गया।
पीड़ित किसान नीलमणि बरेठ (पिता परशुराम बरेठ) ने अपनी व्यथा सुनाते हुए तहसीलदार डभरा को आवेदन सौंपकर न्याय की गुहार लगाई है।
क्या है पूरा मामला?
ग्राम कांसा स्थित शासकीय भूमि खसरा नंबर 427/1 (रकबा लगभग 0.40 एकड़) पर पीड़ित किसान का परिवार अपने बाप-दादा के समय से खेती करता आ रहा है। इस वर्ष भी किसान नीलमणि बरेठ ने अपनी पूरी पूंजी लगाकर खेत में उड़द और तिल की फसल बोई थी। फसल लहलहा रही थी और किसान को अच्छी उपज की उम्मीद थी।
लेकिन आरोप है कि 10 अगस्त 2026 की सुबह लगभग 9:00 बजे, वर्तमान सरपंच श्री जयंती प्रेमचंद चन्द्रा द्वारा बिना किसी पूर्व मौखिक या लिखित नोटिस के गांव के चरवाहे (घांसीराम यादव) को भेजकर मवेशियों के माध्यम से पूरी खड़ी फसल को रौंदवा और चरवा दिया गया।
लाखों का नुकसान, आँखों में आंसू
पीड़ित किसान के अनुसार, फसल पूरी तरह नष्ट हो जाने से उन्हें लगभग ₹3,50,000 (तीन लाख पचास हजार रुपये) का सीधा आर्थिक नुकसान हुआ है।
“मैं विधिवत तरीके से भूमि छोड़ने को तैयार हूँ, लेकिन किसी सक्षम राजस्व अधिकारी के आदेश के बिना मेरी खड़ी फसल को इस तरह दबंगई से नष्ट कर देना कहाँ का न्याय है?”
— नीलमणि बरेठ (पीड़ित किसान)
पीड़ित का कहना है कि वर्ष 1990 से उनकी दादी रमुला बाई द्वारा इस भूमि पर खेती की जा रही थी। पूर्व में ‘नरवा-गरवा-घुरवा-बारी’ योजना के तहत बेदखली के बाद जब कोई कार्य नहीं हुआ, तो वर्ष 2023 से वे पुनः इस पर खेती कर रहे थे। घटना के समय के फोटो, वीडियो और प्रत्यक्षदर्शी गवाह भी मौजूद हैं।
प्रशासन के सामने उठे 5 तीखे सवाल:
क्या बिना किसी वैधानिक राजस्व आदेश के किसी किसान की खड़ी फसल को नष्ट करना कानूनन सही है?
अगर बेदखली करनी ही थी, तो नियमानुसार नोटिस क्यों नहीं दिया गया?
मेहनत की फसल का जो 3.5 लाख का नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई कौन करेगा?
क्या जनप्रतिनिधियों को कानून हाथ में लेने का अधिकार मिल गया है?
क्या तहसील प्रशासन इस मामले में निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करने की हिम्मत दिखाएगा?
पीड़ित किसान की मांगें:
घटना की तत्काल निष्पक्ष जांच कराकर पंचनामा तैयार किया जाए।
नष्ट हुई फसल एवं आर्थिक नुकसान का सटीक आंकलन कर मुआवजा दिया जाए।
फसल नष्ट करने वाले सरपंच, चरवाहे एवं अन्य संबंधित व्यक्तियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई हो।
भविष्य में किसी भी अनधिकृत हस्तक्षेप या नुकसान पर रोक लगाई जाए।
अब देखना यह होगा कि डभरा तहसील प्रशासन इस गरीब किसान की आवाज सुनता है या फिर मामले को कागजों में दबा दिया जाता है! जनपक्ष पत्रकारिता इस मुद्दे पर लगातार नजर बनाए रखेगी।





