वर्ष के सबसे बड़े पर्व की शुरुआत –माह दिसम्बर – राकेश नारायण बंजारे

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खरसिया। गुरु पर्व माह दिसम्बर की शुरुआत प्रथम तिथि से ही गुरु घासीदास बाबा जी के छायाचित्र और जैतखाम पर दीप प्रज्वलित कर की जाती है।
18 दिसंबर को संत शिरोमणि गुरु घासीदास बाबा जी की जयंती होने के कारण पूरा दिसंबर माह गुरु पर्व माह के रूप में मनाया जाता है। यह महीना सतनाम अनुयायियों के लिए विशेष महत्व रखता है। 18 दिसंबर को गुरु घासीदास जयंती की तैयारी और उत्साह दिसंबर के आरंभ से ही प्रारंभ हो जाता है। पूरे माह और इसके बाद भी विभिन्न तिथियों और दिनों में गुरु घासीदास बाबा जी की जयंती मनाई जाती है।
‘मनखे-मनखे एक बरोबर’ का अमर संदेश देने वाले गुरु घासीदास बाबा जी के जन्म दिवस के उपलक्ष्य में दिसंबर की पहली तिथि से ही गुरु पूजा प्रारंभ हो जाती है। इस अवसर पर बाबा जी के छायाचित्र और पवित्र जैतखाम पर दीप प्रज्वलित कर आशीर्वाद प्राप्त किया जाता है। साथ ही, विश्व के समस्त प्राणियों में सद्भाव, शांति और एकता की कामना की जाती है।
गुरु घासीदास बाबा जी के विचार और उनकी शिक्षाएँ आज भी मानवता को सही मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करती हैं। उनका यह संदेश हमें आपसी भेदभाव को मिटाकर समरसता और समानता के पथ पर चलने की प्रेरणा देता है।

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