Tuesday, July 28, 2026
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ज़िंदगी

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ज़िंदगी

 

ऐ ज़िंदगी—

जाने कितने रंग दिखाती ।

कभी हँसाती, कभी रुलाती।

कभी दिन में तारे दिखलाती।

कभी खुशियों की बारिश है लाती,

कभी गमों का दरिया भर जाती है।

अच्छे – बुरे कर्मों का हिसाब

किस्तों में कर जाती। ऐ ज़िंदगी—

 

कभी आवाक्- सी है ज़िंदगी,

तो कभी बेबाक – सी है ज़िंदगी।

ज़ख्म भी देती है ज़िंदगी,

मरहम भी लगाती है ज़िंदगी।

शांति और बेबाकपन की

खुली किताब बन जाती।ऐ ज़िंदगी—

 

कभी आश है ज़िंदगी

तो कभी विश्वास है ज़िंदगी।

ज़िंदगी खेल भी है

तो जंग भी है ज़िंदगी।

आशा और विश्वास की

पराकाष्ठा बन जाती। ऐ ज़िंदगी —

जाने कितने रंग दिखाती।

 

हेमलता जायसवाल

झारसुगुडा,ओड़िशा

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