*गुरुघासीदास जयंती को मात्र 1दिन 18 दिसम्बर को ही मनाने के गलत निर्णय का विरोध*

रायपुर। विश्व भर को मानवता का संदेश देने वाले मनखे मनखे एक हैँ का अमर संदेश देने वाले बाबा गुरु घासीदास सर्व समाज के गुरु हैँ, उनके जन्म जयंती पर्व को सतनामी समाज के साथ साथ अन्य समाज और शासन प्रशासन के लोग भी बड़ी श्रद्धा, और विश्वास के साथ मनाते हैँ, जयंती का पर्व परम्परा नुसार 18 दिसंबर से लेकर 31 दिसंबर तक गुरु पर्व के रूप मे मनाया जाता हैँ,सतनामी समाज के इस गौरवशाली पल को, कुछ लोगो द्वारा सुनियोजित ढंग से ख़त्म करने का अनुचित प्रयास किया जा रहा हैँ,, विगत 1 मई को रायपुर मे प्रगतिशील छग सतनामी समाज के द्वारा आयोजित बैठक मे निर्णय लिया गया हैँ कि गुरुघासीदास जयंती केवल एक दिन 18 दिसंबर को ही मनाया जावेगा,, इस प्रकार का तानाशाही निर्णय समाज के कला संस्कृति धरोहर और पहचान को ख़त्म कर समाज को कमजोर कर बाँटने का प्रयास हैँ,,यह एक आत्मघाती कदम हैँ, पुरे दिसम्बर महीना को गुरूपर्व के रूप मे मनाया जाता हैँ, विश्वभर मे केवल गुरुघासीदास जयंती ही एक मात्र पर्व हैँ जिसे लगातार महीनो तक उत्साह और गरिमा के साथ मनाया जाता हैँ, जिसके बदौलत समाज की आन बान शान पहचान हैँ उसी को ख़त्म करने की साजिश बड़ी बुद्धिमता से रची जा रही हैँ,,समाज आज इसका विरोध नहीं करेंगे तो कल बहूत पछताना पड़ेगा,, जयंती पर्व को मात्र एक दिन मे समेट देना संभव ही नहीं हैँ, जयंती पर्व केवल एक जन्मोत्सव न होकर सभी समाज को एक विचारधारा मे जोड़ने, समनवित करने का कार्यक्रम हैँ,विशाल समाज हैँ और प्रदेश के हर गांव गली क़स्बा नगर चौक मे गुरू घासीदास जयंती अपनी व्यवस्था के अनुसाए मनाते हैँ, जिससे सभी जन एक दूसरे के कार्यक्रम मे आते जाते हैँ, आपसी प्रेम सहयोग बढ़ता हैँ, सामाजिक समनवय बढ़ता हैँ, गैर सतनामी को अतिथि बनाकर सम्मान देते हैँ जिससे उनके साथ की दूरिया मिटती हैँ, सामाजिक समरसता बढ़ती हैँ, जयंती पर्व से समाज की मूल कला संस्कृति पंथी नृत्य सतनाम गीत भजन निखरता हैँ, नए नए कलाकार पैदा होते हैँ, समाज के लाखो कलाकारों को रोजगार मिलता हैँ, समाज मे नए नेतृत्व लीडरशिप निकलते हैँ,और समाज की एकता ताक़त स्पस्ट दिखाई देती हैँ,जयंती आयोजन के दोनों पक्षो पर विचार किये बिना इसे सिमित करना उचित नहीं माना जा सकता,,ऐसे आयोजन चलते ही रहना चाहिए, सतनामी समाज के पंजीकृत कलाकार संगठन के प्रदेश अध्यक्ष हृदय प्रकाश अनंत ने इस निर्णय को गलत बताकर इसका पुरजोर विरोध किया हैँ व जयंती पर्व को यथावत चलाते रहने कि अपील किया हैँ, इस प्रकार से समाज सुधार के नाम पर पुरे जयंती पर्व को ही ख़त्म करना पूरी तरह से गलत और अव्यवहारिक निर्णय हैँ,,ख़त्म करना हैँ तो समाज मे फैली हुई तमाम बुराई को ख़त्म करो, नशा पान, शराब खोरी को बंद करो, अभद्रता को बंद करो, अशिक्षा को दूर करो,आज सतनामी समाज के लोग अन्य समाज या धर्म मे पलायन कर रहे हैँ उसे रोको, समाजीक बुराइयों को बंद किया जाये, आज बहुतायत लोग नशा पान दुर्व्यशन में मदमस्त है,उसे बंद करो, समाज मे शिक्षा की कमी को दूर करो , हर ब्लॉक तहसील जिला मे निःशुल्क कोचिंग सेंटर खोलो,, बेरोजगार को रोजगार दिलाओ, गरीबो का सहारा बनो, बिखरे हुए समाज को एकत्रित किया जाये, आपसी समन्वय बढ़ाया जाये,गुरुघासीदास के अमर वाणी को पंथी नृत्य सतनाम भजन लोकगीत संगीत के माध्यम से विश्व भर मे फैलाने का काम केवल कलाकारों ने किया हैँ,आज कलाकार कलाकारी करना बंद कर दे तो समाज सुना हो जायेगा ।आज सतनामी समाज के सभी कलाकार देश प्रदेश मे में जाकर बाबा जी के संदेश को पंथी मंगल भजन गा रहे हैं और समाज को जगाने का काम कर रहे हैँ,छत्तीसगढ़ में सिर्फ कलाकार ही है जो आज बाबा गुरु घासीदास को पूरा विश्व लेवल में जनवाने का काम किया है यह कलाकारों की देन है।इस प्रकार से अनुचित निर्णय को समाज मे थोपना स्वीकार्य नहीं हैँ, इस गलत निर्णय पर तुरंत रोक लगाया जाये अन्यथा प्रदेश भर मे कड़ा से कड़ा विरोध किया जावेगा,-


