Wednesday, February 18, 2026

दलालपाली में तीन दिवसीय बाबा गुरू घासीदास जयंती समारोह में गूँजा सतनाम का संदेश

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 *दलालपाली में तीन दिवसीय बाबा गुरू घासीदास जयंती समारोह में गूँजा सतनाम का संदेश*

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सक्ती | प्रातः स्मरणीय परम पूज्य संत शिरोमणि गुरु घासीदास बाबा जी की तीन दिवसीय जयंती समारोह ग्राम दलालपाली में अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ संपन्न हुआ। तीन दिनों तक चले इस आयोजन में आसपास के ग्रामों से बड़ी संख्या में श्रद्धालुजन शामिल हुए और सतनाम संदेश का सामूहिक स्मरण किया।

कार्यक्रम का शुभारंभ बाबाजी के छायाचित्र एवं जैतखाम पर विधिवत पूजा-अर्चना एवं चौका-आरती के साथ किया गया। पूरा वातावरण “जय सतनाम – जय सतनाम” के जयघोष से गूंजायमान हो उठा।

इस अवसर पर परम पूज्य संत खड़ग दास बाबा जी एवं तौलीपाली वाले बाबा जी ने सुमधुर पंथी गीत-संगीत की प्रस्तुति देकर श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया।

लोककला मंच जमगहन से मुकेश लहरे तथा लोककला मंच मौहापाली से दिनेश कुमार खंडेलवाल सहित विभिन्न ग्रामों से पधारे लोक गायकों ने पारंपरिक लोक-सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। पंथी नृत्य ‘खर्रा छाल’ तथा सतनाम भजन (लिखित राम) की प्रस्तुति ने आयोजन को आध्यात्मिक ऊँचाई प्रदान की।

गुरु बालक दास बालिका पंथी पार्टी बछौरडीह, सिंगर सुमित्रा सायर, सिंगर दारा सिंह बंजारे तथा सुमित्रा लोक संगीत जर्वे की सजीव प्रस्तुतियों ने दर्शकों की भरपूर सराहना प्राप्त की। तीनों दिवस तक भजन, कीर्तन, पंथी नृत्य और लोकसंगीत का क्रम निरंतर चलता रहा।

समारोह के अंतिम दिवस विशेष आमंत्रित अतिथियों में राकेश नारायण बंजारे (प्रदेश प्रवक्ता, साहित्य प्रकोष्ठ), तोरन लक्ष्मी (पूर्व अध्यक्ष, युवा प्रकोष्ठ, प्रगतिशील छत्तीसगढ़ सतनामी समाज खरसिया), सोमनाथ भारद्वाज (सिंधीतराई) एवं जागेश्वर लक्ष्मी (फूलबंधिया) उपस्थित रहे।

प्रदेश प्रवक्ता राकेश नारायण बंजारे ने अपने उद्बोधन में कहा कि संत गुरु घासीदास बाबा जी का जीवन समता, सत्य, अहिंसा और मानवता का अमर संदेश देता है। उन्होंने कहा, “बाबाजी का ‘मनखे-मनखे एक समान’ का संदेश समाज को एकता के सूत्र में पिरोता है। शिक्षा, संस्कार और सामाजिक चेतना के माध्यम से समाज को संगठित होकर आगे बढ़ना होगा। युवा पीढ़ी को अपने संत परंपरा से प्रेरणा लेकर समाज निर्माण में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।”

उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे आयोजन सामाजिक एकता और सांस्कृतिक पहचान को सुदृढ़ करने का सशक्त माध्यम हैं।

इस तीन दिवसीय आयोजन को सफल बनाने में युवा समिति एवं महिला समिति की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

युवा समिति में अध्यक्ष साहिल अजगल्ले, उपाध्यक्ष दिनेश खूंटे, सचिव देवेन्द्र एवं रितेश, सह सचिव भारतभूषण, लक्की अजगल्ले, आकाश खूंटे तथा कोषाध्यक्ष लकेश्वर, जगमोहन, सुनील खूंटे एवं अश्विनी सहित समस्त सदस्यों का सक्रिय योगदान रहा।

महिला समिति में अध्यक्ष सुमनलता खूंटे एवं सेतबाई अजगल्ले, उपाध्यक्ष सुनीता खूंटे, नीरा भारद्वाज, रश्मि, सचिव जमुना खूंटे, गीता खूंटे, सोनिया, सह सचिव अमृतबाई अजगल्ले, सीता अजगल्ले तथा कोषाध्यक्ष बृंदबाई लहरे, सरोजनी खांडे एवं ललिता अजगल्ले की उल्लेखनीय भूमिका रही।

समाज के गौरव सजन (सी.एफ.), राजू (सी.एफ.), करन (सी.एफ.), अनिल (सी.एफ.) एवं रामगिलास (थाना पुलिस) की उपस्थिति भी प्रेरणादायी रही। निर्णायक मंडल में सागर अजगल्ले, जानकी खूंटे, रेशम खूंटे, धनीराम खूंटे, रितेश खूंटे ने अपनी जिम्मेदारी निभाई।

ग्रामवासियों में बिहारी लाल कुर्रे, लिखीराम, बेदराम, जीतराम, कुंजराम, मनीराम सहित अनेक ग्रामवासियों का सराहनीय योगदान रहा। मंच संचालन विजय प्रकाश कुर्रे, सुरेन्द्र खांडे, उत्तम खूंटे एवं आशीष जांगड़े ने किया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता जमुना खूंटे, रश्मि खूंटे, सीता अजगल्ले, सोनिया कुर्रे, विजय प्रकाश कुर्रे (चीकू जी), मीडिया प्रभारी विधायक चन्द्रपुर एवं सभी पंचगण ने की।

समारोह के समापन पर आयोजन समिति ने समस्त ग्रामवासियों एवं सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया। ग्राम दलालपाली सहित आसपास के ग्रामीणों के सक्रिय सहयोग से यह तीन दिवसीय जयंती समारोह श्रद्धा, भक्ति और सामाजिक एकता का प्रेरक उदाहरण बनकर संपन्न हुआ।

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